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Aankhein Nazar Shayari

Jhuki Jhuki Nazar Teri, Kamal Kar Jaati Hai,
Uthti Hai Ek Baar To, Sawaal Kar Jaati Hai.

Aankhein Nazar Shayari

Aankhein Nazar Shayari

झुकी झुकी नजर तेरी, कमाल कर जाती है,
उठती है एक बार तो, सवाल कर जाती है।

अजीब है ये मोहब्बत भी जनाब,
जिसे देखने को ये आँखे तरसती है,
फिर उसे ही देख ये आँखें क्यों झुकती है।

बातें लफ़्ज़ों से होती तो कोई मसला ही न था जनाब,
नजरें झुका कर उन्होंने मामला ही बिगाड़ दिया था।

देखे अगर कोई तो झुका लेते हैं नज़रो को बड़े अदब से,
कि तेरे अलावा किसी और से नज़रे मिलाना हमें गवाँरा नही हैं।

हम तो तारीफ लिखने बैठे थे उनके मुकम्मल हुस्न पर,
मगर ये अल्फाज़ ही थम गए उनकी झुकी नज़रे देखकर।

इन झूकी नजरों से कयामत का असर होता है,
ऊपर से तेरा यूँ मुस्कुराना बड़ा ही सितमगर होता है।

इन झुकी हुयी पलको मे बसेरा है तेरा,
काश जब भी ये पलके उठें तो बस सामने हो चेहरा तेरा।

इन झुकी हुई नज़रों का ऐतबार मत करना जनाब,
अगर कमबख्त उठ गई तो खंजर का काम करती है।

जनाब ये जो झुकी नज़रों से इज़हार होता है,
हाय क्या खूब कमाल होता है।

 

जवाब भी बड़ा करारा सा दिया था उसने,
नज़ारे उठाकर जब देखा मैंने,
पलकें झुकाकर सब कह दिया था उसने।।

जनाब यूँ तो कई नज़रे मिलती है उनकी नज़रों से हर रोज़,
मगर वो हमारी इन झुकी नज़रों पे फ़िदा है।

जितनी दफा इन झुकी हुई नजरों को आपका दीदार होता है,
खुदा कसम उतनी ही दफा इस दिल को आपसे फिर से प्यार होता है।

झुकी नज़रों से वो भी क्या कमाल करते थे,
इशारों में वो हम्हे चूमने की बात करते थे,
लगाने को गले हमें वो पास आ जाते थे,
मुस्कुराते हुए अपनी इच्छा बताते थे।

झुकी नज़रो से गुज़ार लेते है ये ही सोचकर,
कही ये आंखे ना भर आये मेरी उसे देखकर।

झुकी सी ये पलकें और कातिल ये निगाहें तेरी,
कहीं मार न डाले मुझको ये अदाएं तेरी।

कौन कहता है इश्क मॉडर्न हो गया हैं,
हमने तो आज भी झुकी नजरों के बहुत दीवाने देखे हैं।

मेरी उनसे नज़रें मिली थी,
उन्होंने शर्मा के नजर ही झुका ली थी।

नज़रो का झुके रहने भी एक अलग अंदाज़ था,
वक़्त नहीं था की कहानी बताओ अपनी,
इसलिए शांत रहना ही कुछ अपना अंदाज़ था।

नजाकत-ए-इश्क इतना तो बरकरार ही हैं,
कि वो सामने आए और हमारी नजर झुक जाए।

सुन इतनी ज़ेहमत मत उठा हमे समझाने की,
तेरी झुकी नज़रे सब समझा रही है।

सुनो झुका के रखते है हम अपनी नज़रें,
कही कोई उन झुकी नज़रो में तुम्हे ना देख ले।

 

सुनो झुकी झुकी नज़रों से आपका दीदार किया हैं,
हाँ हमने आपसे सच्चा प्यार किया हैं।

तेरे कहने पर हम तुझे भूल गये है,
तुझे देख न सके इसलिये,
तुझे देख अपनी ये नज़रे झुका लेते है।

तेरी इन झुकी सी नज़रों में एक हया है,
करती है तेरी खूबसूरती को बयां है।

तेरी वो झुकी सी नज़र कुछ तो बयान कर रही थी,
तू ना सही तेरी वो परछाई बहुत कुछ कह रही थी।

उनकी आंखो से इस दिल पर वार हो गया है,
हमे तो उनकी झुकी नजरों से ही प्यार हो गया है।

उनकी नजरों के तीर दिल पे यु चल जाते है,
जब भी वो अपनी झुकी नजरें को उठाते है।

उस झूकी नजर की बेकरारी तुमने कभी समझी ही नही थी,
जो तुम्हे एक नजर देखने के लिये हर वक्त बेकरार रहा करती थी।

उसकी नज़र झुकी है तभी तक समझो राहत है,
अगर नज़र उठी तो फिर क़यामत ही क़यामत है।

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